PM मोदी के रिलायंस JIO के विज्ञापन में दिखने के क्या मायने है ये अब धीरे धीरे देश का जनमानस समझने लगा है । मीडिया के बनाए तिलिस्म के भरोसे नरेंद्र मोदी और भाजपा की यही थी कि देश की जनता को जब चाहे मूर्ख बनाया जा सकता है और इसी over confidence में नरेंद्र मोदी भारी गलती कर गए और अपने महिमामंडन के नशे में ये तक भूल गए कि उनकी प्राथमिकता लगातार घाटे में जा रहे BSNL को संभालना है न कि रिलायंस की 4G सिम बेचना ।
अंबानी अडानी जैसे उद्योगपतियों के पैसे पर अपनी राजनीती चमका कर खुद को भारत माँ का लाल बताने वाले देश के धुरंधर प्रधानमंत्री एक के बाद एक हर क्षेत्र हर दिशा में वर्षों से कार्यरत सरकारी ढांचों और उपक्रमों को ध्वस्त कर अपनी भारत माँ को चंद उद्योगपतियों के हाथ बेचने पर आमादा है ।
टेलीकॉम सेक्टर के जानकार ये भी संभावना जताते है कि जल्द ही BSNL स्वयं के लिए स्पेक्ट्रम लेने की बजाय रिलायंस के स्पेक्ट्रम से शेयरिंग प्राप्त करेगा । यानि BSNL का ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट रिलायंस से उधार लेकर चलेगा ।
लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि टेलीकॉम सेक्टर पहला ऐसा सेक्टर नहीं है जिसमें मोदी सरकार ने रिलायंस के प्रति अपनी गहरी स्वामिभक्ति का परिचय दिया हो । ऐसी कई करतूतें मोदी सरकार पिछले दो साल में कई बार कर चुकी है चाहे वो डिफेन्स में FDI लागू होने पर सरकार की तरफ से लाइज़निंग करने के लिए रिलायंस को नियुक्त करना हो या फिर मोदी के PM बनने के 4 महीने के भीतर ही रिलायंस के देश भर में बंद पड़े 19 हज़ार से ज़्यादा पेट्रोल पम्प का खुल जाना हो ।
ऐसा ही एक उदाहरण आपको मिलेगा ONGC के मामले में ।
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत सरकार के एक महत्वपूर्ण उपक्रम ONGC को दो बड़े झटके देते हुए उसे इस हाल में ला दिया है जहाँ से शायद आने वाले दस सालों के अंदर ONGC का नामोनिशान मिट जाएगा । पहले झटके के तौर पर PM मोदी ने ONGC में निजी निवेश को मंज़ूरी दे दी और ये निवेश किया उनके आका मुकेश अंबानी ने ।
इसमें गौर करने वाली बात ये है कि ONGC भारत सरकार के लिए एक constant profit makin body था, यानि उसकी वित्तीय स्थिति में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसके चलते निजी निवेश से धन जुटाने की ज़रूरत पड़े । देखते ही देखते एक पुराने और लगातार लाभ देने वाले सरकार के उपक्रम से बिना कुछ किए मुनाफा कमाने लगी रिलायंस ! और बहाना ये बनाया गया कि इस से सरकारी खजाने को एकमुश्त 1600 करोड़ रूपए मिले ।
1600 करोड़ वो रकम है जिसका एक चौथाई यानि 400 करोड़ तो PM मोदी की एक साल की सुरक्षा में खर्च हो जाता है यानि सरकार का खजाना अचानक से कुबेर का खजाना हो गया हो ऐसी भी कोई बात नहीं थी ।
PM मोदी यहीं नहीं रुके, इस मंज़ूरी के बाद उन्होंने ONGC को और बड़ा झटका दिया और ONGC के सबसे बड़े सप्लाई हेड्स या साधारण भाषा में कहे सबसे बड़े ग्राहक में से एक भारतीय रेलवे को डीज़ल सप्लाई करने का काम ONGC से छीनकर रिलायंस पेट्रोलियम को दे दिया । अब ONGC दो तरह से पीटा हुआ है, पहला जो काम उसके पास है उसमें से कमाए पैसे में भी मुकेश अंबानी का हिस्सा और पुराने ग्राहकों को भी एक एक करके रिलायन्स को सौंपा जा रहा है और ज़ाहिर है इसमें ONGC को तो कोई हिस्सा मिलना नहीं है ।
अब रही बात कि ये सारी जानकरियाँ सार्वजानिक क्यों नहीं होती ।
इस समय देश में हिंदी और गैरहिन्दी भाषी लगभग 90 से ज़्यादा चैनल्स है जिन्हें 24hour broadcast की अनुमति प्राप्त है । ये 90 से ज़्यादा चैनल्स आज से तीन साल पहले तक 39 अलग अलग मीडिया ग्रुप्स द्वारा संचालित किए जाते थे । आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि चैनल्स की संख्या वही है लेकिन संचालन करने वाले ग्रुप्स 39 से 21 रह गए है ।
ऐसा इसलिए क्योंकि इन तीन सालों में network18 नामक एक मीडिया ग्रुप ने 18 ग्रुप्स को खरीद कर अधिगृहित कर लिया । और इस network18 ग्रुप के मालिक का नाम है "मुकेश अंबानी"
यानि जो न्यूज़ चैनल्स पर हर शाम आपको गाय, गोबर, गौमूत्र, लवजिहाद, ISIS, पाकिस्तान, चीन और मंदिर मस्जिद दिखाया जाता है जिसे देखकर आपका खून खौल उठता है वो कोई जोश नहीं बल्कि एक तरह का ड्रग्स है जो आपकी भावनात्मक नसों में घोला जा रहा है ताकि अपने ही देश को लूटने वाले चंद गद्दार तथाकथित राष्ट्रवादियों और उद्योगपतियों को देखने और देखकर प्रतिकार करने की क्षमता देश के लोगों में न रह पाए ।
यूँ समझ लीजिए ईस्ट इंडिया कंपनी-II का जन्म इस बार भारत के अंदर ही हुआ है और इसे सुरक्षा देने वाली "खाकी चड्डी" पहनी पुलिस तो है ही ।
जियो से बरबादी तक.......
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